जाने भारत और चीन के मध्य हुआ पंचशील समझौता।

भारत की आजादी के समय भारत और चीन के रिश्ते इतने कडवे नहीं थी जितने कि 1962 के बाद हो गये हैं। चूंकि उस समय अमेरिका, पाकिस्तान का पक्ष लेता था इसलिए भारत ने अपने पड़ोसी देश चीन से मधुर रिश्ते रखने में ही भलाई समझी।

यही कारण है कि भारत ने 1950 में चीन द्वारा तिब्बत पर कब्ज़ा करने का पुरजोर विरोध नहीं किया था लेकिन जब भारत ने दलाई लामा को भारत में शरण दी तो रिश्ते कडवे होने शुरू हो गये।

जवाहरलाल नेहरू जाने भारत और चीन के मध्य हुआ पंचशील समझौता।


हालाँकि तत्कालानीं प्रधानमन्त्री नेहरु ने पंचशील समझौते के माध्यम से दोनों देशों के बीच मधुर सम्बन्ध बनाने की कोशिश की लेकिन वे कामयाब नहीं हुए और दोनों देशों के बीच 1962 का युद्ध हुआ।

अब आइये इस लेख में जाने भारत और चीन के मध्य हुआ पंचशील समझौता क्या था और क्यों किया गया था?

पंचशील समझौते के बारे में:

पंचशील समझौता, चीन के क्षेत्र तिब्बत और भारत के बीच आपसी संबंधों और व्यापार को लेकर हुआ था।

पंचशील, या शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांत, पर पहली बार औपचारिक रूप से भारत और चीन के तिब्बत क्षेत्र के बीच व्यापार और शांति के समझौते पर 29 अप्रैल, 1954 को हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और चीन के पहले प्रीमियर (प्रधानमंत्री) चाऊ एन लाई के बीच हुआ था।

पंचशील का संधि विच्छेद है पंच+शील अर्थात पांच सिद्धांत या विचार!

पंचशील शब्द ऐतिहासिक बौद्ध अभिलेखों से लिया गया है जो कि बौद्ध भिक्षुओं का व्यवहार निर्धारित करने वाले पांच निषेध होते हैं अर्थात इन कामों को करने की मनाही हर बौद्ध व्यक्ति के लिए होती है।

अप्रैल 1954 में भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा मानते हुए चीन के साथ ‘पंचशील’ के सिद्धांत पर समझौता कर लिया। इस सिद्धांत के मुख्य बिंदु थे:

(1) दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना

(2) एक-दूसरे देश पर आक्रमण न करना

(3) शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की नीति का पालन करना

(4) परस्पर सहयोग एवं लाभ को बढ़ावा देना

(5) सभी देशों द्वारा अन्य देशों की क्षेत्रीय अखंडता और प्रभुसत्ता का सम्मान करना

पंचशील संधि ने भारत और चीन के संबंधों के तनाव को काफ़ी हद तक दूर कर दिया थ। इन संधि के बाद भारत और चीन के बीच व्यापार और विश्वास बहाली को काफी बल मिला था। इसी बीच हिंदी-चीनी भाई भाई के नारे भी लगाये गये थे।

सन 1959 के तिब्बती विद्रोह की शुरुआत में, अपनी जान की रक्षा करने के लिए दलाई लामा और उनके अनुयायी, सीआईए की मदद से तिब्बत से भाग कर 1959 में असम में पहुँच गये थे। भारत ने उन्हें शरण दी बस यहीं से भारत और चीन के बीच पंचशील समझौता खतरे में पड़ गया क्योंकि समझौते में लिखा था "एक दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल ना देना।" 

इसके बाद रिश्ते ख़राब होते गये और चीनी सरकार के बढ़ते विरोध के बीच वहां की सरकार ने जनता को शांत करने के लिए देशभक्ति की अलख जगाते हुए भारत के खिलाफ सन 1962 में एकतरफा युद्ध की घोषणा कर दी थी।

इस युद्ध के लिए ना तो भारत की सेना तैयार भी और ना यहाँ की सरकार. इसका परिणाम यह हुआ कि चीन ने भारत की जमीन का बहुत बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में कर लिया था।

इस प्रकार पंचशील समझौता भारत और चीन से बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंधों की ठीक करने की दिशा में उठाया गया एक सोचा समझा कदम था लेकिन चीन ने इसका गलत फायदा उठाया और भारत की पीठ में छुरा मारने का काम किया है।

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