स्वतंत्रता सेनानी और उनके नारे !!!

भारत की आजादी के लिए चलने वाले स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मशहूर सेनानियों ने कई नारे दिए।

                                

स्वतंत्रता सेनानी वह विभूतियां हैं, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता प्राप्ति में अपना अहम योगदान दिया। जब हम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में सोचते हैं, तो हमारे मन में कई नाम आते हैं, पर मुख्यतः इनमें से भगत सिंह, महात्मा गाँधी, चन्द्र शेखर आजाद और सुभाष चंद्र बोस जैसे नाम हमारे दिमाग में सबसे पहले आते हैं, इन क्रांतिकारियों द्वारा देश के लिए किये गये बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।





स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा।                                    

        बालगंगाधर तिलक                                                   तिलक द्वारा प्रचलित किया गया यह नारा उनके साथी Joseph “Kaka” Baptista द्वारा 1898 के आस-पास बनाया गया था. यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रसिद्द नारों में से एक है और इसके प्रयोग से करोड़ों भारतीय प्रेरित हो freedom struggle का हिस्सा बने.                                                                                             





जय जवान जय किसान

           लालबहादुर शास्त्री

भारत के दूसरे प्रधानमन्त्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने सन 1965 में रामलीला मैदान, दिल्ली  में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देश को यह ओजपूर्ण नारा दिया था.






जय हिन्द


                सुभाष चंद्र बोस

नेताजी ने यह नारा 1947 में create किया था और वे इसे हर एक मीटिंग या भाषण के अंत में बोलते थे. बाद में इस नारे को राष्ट्रीय नारे के रूप में स्वीकार कर लिया गया और आज भी बहुत से लीडर्स अपने संबोधन का अंत “जय हिन्द” के साथ करते हैं.




करो या मरो

              महात्मा गांधी

Quit India Movement के दौरान गाँधी जी ने 8 अगस्त 1942 को मुंबई में एक सभा में “करो या मरो”, “Do or Die” का नारा दिया था. इसका अर्थ था कि या तो हम भारत को स्वतंत्र करा लें या इस प्रयास में अपनी जान दे दें.





अंग्रजों भारत छोड़ो

                महात्मा गांधी

द्वितीय विश्व युद्द में इग्लैंड को कई मोर्चों पर पराजय का सामना करना पड़ रहा था और जापान मजबूती से आगे बढ़ रहा था. गाँधी जी का सोचना था कि यदि अंग्रेजों ने भारत नहीं छोड़ा तो जापान भारत पर आक्रमण कर सकता है इसलिए अगस्त 1942 में उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन शुरू किया और अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया.




सत्यमेव जयते

             मदन मोहन मालवीय

मालवीय जी ने मुण्डक उपनिषद से यह term लिया और इसे प्रसिद्द बनाया. इसे भारत के national motto के रूप में अपनाया गया और Indian emblem में भी स्थान दिया गया.


इंकलाब जिंदाबाद
        
              भगतसिंह
  यह नारा मुस्लिम लीडर हसरत मोहानी जी द्वारा बनाया गया था, जिसे भगत सिंह ने लोकप्रिय बनाया. भगत सिंह ने यही नारा लगाते हुए 8 April 1929 को अपने साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ Central Legislative Assembly में बम फेंका था.



तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा।
       


           सुभाष चंद्र बोस
4 July, 1944 को बर्मा में भारतीयों के समक्ष दिए गए अपने एक भाषण  में नेताजी ने भारतीयों से अपील की – “Give me blood and I shall give you freedom!” और उनके इस उद्घोष ने करोड़ों भारतीयों में देश के प्रति बलिदान होने का जोश भर दिया.


वन्दे मातर

    

         बंकिम चंद्र चटर्जी

यह नारा देश के क्रांतिकारियों के बीच प्रसिद्द था. इसे 1882 में श्री बंकिमचन्द्र चटर्जी ने अपनी रचना “आनंदमठ” में प्रयोग किया था.




सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है….देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है…

     
     राम प्रसाद बिसमिल
यह कविता सर्वप्रथम उर्दू में बिस्मिल अज़ीमाबादी ने 1921 में लिखी थी. महान फ्रीडम फाइटर रामप्रसाद बिस्मिल ने इसे स्वतंत्रता संग्राम के नारे के रूप में प्रसिद्द बनाया.




दुश्मनों की गोलियों का हम सामना करेंगे, आज़ाद हैं, आज़ाद ही रहेंगे
      
    
      चंद्रशेखर आजाद
शहीद क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद का वास्तविक नाम चंद्रशेखर सीताराम तिवारी था। 25 वर्ष की अल्प-आयु में देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर देने वाले भारत माँ के इस वीर सपूत का दिया यह नारा आज भी नवयुवकों को उर्जा से भर देता है.




आराम हराम है


                जवाहरलाल नेहरू
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने युवाओं को कर्मठ व परिश्रमी बनाने के उद्देश्य से “आराम हराम है…” का नारा दिया था.




अब भी जिसका खून न खौला खून नहीं वो पानी है…जो ना आये देश के काम वो बेकार जवानी है

           चंद्रशेखर आज़ाद

युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने के लिए आह्वान करता यह नारा भी अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद ने दिया था.






मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी

             रानी लक्ष्मीबाई

1858 में जब Sir Hugh Rose के नेत्रित्व में ब्रिटिश सेना ने  झाँसी पर कब्ज़ा करने की कोशिश की तब महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ने हथियार डालने से मन कर दिया और कहा-




साइमन गो बैक

             लाला लाजपतराय

1927 में Sir John Simon की अध्यक्षता में ब्रिटेन से 7 लोगों का एक कमीशन भारत भेजा गया जिसका नाम इसके अध्यक्ष के नाम पर ” साइमन कमीशन” रखा गया. इसका काम Indian Constitution का अध्यन करना और उसमे सुधार लाना था. चूँकि इस कमीशन में एक भी भारतीय नहीं था इसलिए भारत में इसका विरोध हुआ, और इसी दौरान लाला लाजपत राय जी ने Simon Go Back का नारा दिया.


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